उधार की सार्थकता
### उधार — कितना सार्थक होता है! एक सामाजिक व्यंग्य रचना उधार भी बड़ी कमाल की चीज़ है। जब तक मिलता है, आदमी की इज़्ज़त बढ़ाता है और जब लौटाने का समय आता है, तो आदमी की पहचान बदल देता है! उधार लेते समय हम कहते हैं, “आप तो अपने हैं, आपसे क्या पर्दा! बस कुछ दिनों की बात है, पैसा आते ही लौटा दूँगा।” और उधार देने वाला भी भावुक होकर सोचता है, “चलो, किसी के बुरे वक्त में काम आ गए। आखिर इंसान ही इंसान के काम आता है।” लेकिन उसे क्या पता कि उसने पैसे नहीं दिए, बल्कि अपने संबंधों की परीक्षा का प्रश्नपत्र तैयार कर दिया है! उधार लेते समय रिश्ते गहरे होते हैं, और लौटाने के समय नेटवर्क कमजोर हो जाता है। उधार लेने वाला फोन पर बड़ा सक्रिय रहता है। सुबह सुप्रभात, दोपहर में हालचाल और शाम को आध्यात्मिक संदेश—सब नियमित रूप से भेजता है। लेकिन जैसे ही उधार देने वाला पैसे की बात करता है, अचानक जीवन में इतनी व्यस्तता आ जाती है कि मोबाइल तक उठाना कठिन हो जाता है। पहले फोन की घंटी सुनाई देती थी, अब केवल व्यस्त होने का संदेश मिलता है। पहले कहा जाता था, “भाई साहब, आप हमारे लिए परिवार जैसे हैं।” अब लगता है कि परिवा...