आपके विचार आपका संसार
तितली की सोच या गुबरैला की सोच? जीवन में परिस्थितियाँ सभी के सामने आती हैं, लेकिन हर व्यक्ति उन्हें देखने का अपना अलग दृष्टिकोण रखता है। यही दृष्टिकोण तय करता है कि हमें संसार में सौंदर्य दिखाई देगा या केवल गंदगी। एक सुंदर फूल पर बैठी तितली को देखिए। वह फूलों से रस लेती है, रंगों का आनंद लेती है और एक फूल से दूसरे फूल तक उड़ती रहती है। उसके लिए संसार में आकर्षण, सुगंध और संभावनाएँ हैं। दूसरी ओर, गुबरैला उसी संसार में गंदगी और सड़न खोज लेता है। वह जहाँ जाता है, उसे अपनी रुचि के अनुरूप वही दिखाई देता है। प्रश्न यह नहीं है कि संसार में फूल अधिक हैं या गंदगी। प्रश्न यह है कि हमारी दृष्टि किसे खोज रही है। मनुष्य की सोच भी कुछ ऐसी ही होती है। कुछ लोग हर परिस्थिति में कमी, दोष, आलोचना और समस्या खोज लेते हैं। उन्हें अच्छी बात में भी बुराई दिखाई देती है। वे दूसरों की सफलता में भी अपना नुकसान देखते हैं। वहीं कुछ लोग कठिन परिस्थितियों में भी कोई सीख, कोई अवसर और कोई सकारात्मक संभावना खोज लेते हैं। वे समस्याओं से आँखें नहीं चुराते, लेकिन समस्या के भीतर छिपे समाधान को भी देखने की कोशिश ...