दड़बे की मुर्गी
💐 दड़बे की मुर्गी! 💐 मान्यताओं के पिंजरे से बाहर निकलने का साहस एक दिन एक शिष्य अपने गुरु के पास पहुँचा और पूछा— “गुरुदेव, लोगों को वास्तव में खुश रहने के लिए क्या चाहिए?” गुरु ने तुरंत उत्तर नहीं दिया। उन्होंने मुस्कुराकर पूछा— “तुम्हें क्या लगता है?” शिष्य कुछ देर सोचकर बोला— “गुरुदेव, मेरा मानना है कि यदि किसी व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकताएँ पूरी हो रही हों— उसे पर्याप्त भोजन मिले, रहने के लिए घर हो, कोई अच्छा काम या नौकरी हो, आर्थिक सुरक्षा हो और जीवन में सुविधाएँ हों—तो वह खुश रह सकता है।” गुरु कुछ नहीं बोले। उन्होंने शिष्य को अपने साथ चलने का संकेत किया। दोनों कुछ दूर चले और एक दरवाजे के सामने जाकर गुरु रुके। उन्होंने कहा— “यह दरवाजा खोलो।” शिष्य ने दरवाजा खोला। सामने एक बड़ा-सा मुर्गीखाना था। उसमें बहुत-सी मुर्गियाँ और चूजे अलग-अलग पिंजरों में बंद थे। शिष्य ने आश्चर्य से पूछा— “गुरुदेव, आप मुझे यह क्यों दिखा रहे हैं?” गुरु ने कहा— “पहले इनसे कुछ प्रश्न पूछो।” फिर गुरु स्वयं प्रश्न करने लगे— “क्या इन्हें भोजन मिलता है?” शिष्य बोला— “हाँ।” “क्या इनके पास रहने के लिए जगह है?” “हाँ।”...