परिवर्तन और स्थिरता

*परिवर्तन और स्थिरता*

सब कुछ बदल रहा है—
ऋतुएँ, रिश्ते, रास्ते,
आज की हँसी, कल की उदासी,
और समय के साथ
हमारे अपने चेहरे भी।

जो कल अपना था,
आज पराया हो जाता है,
जो आज मिला है,
कल स्मृति बन जाता है।
जीवन निरंतर बहता है—
जैसे नदी,
जो कभी एक क्षण को भी
ठहरती नहीं।

पर इस परिवर्तन के बीच
कुछ ऐसा भी है
जो कभी नहीं बदलता।

विचार बदलते हैं,
पर साक्षी नहीं बदलता।
शरीर बदलता है,
पर चेतना नहीं बदलती।
भावनाएँ आती-जाती हैं,
पर भीतर की शांति
अपनी जगह बनी रहती है।

बाहर संसार में
हर पल परिवर्तन है,
और भीतर कहीं
एक मौन आकाश है
न जन्मता है,
न मिटता है,
न आता है,
न जाता है।

शायद जीवन का रहस्य यही है—
परिवर्तन को रोकना नहीं,
बल्कि उस स्थिरता को पहचानना
जो परिवर्तन को देख रही है।

पत्ते गिरते रहें,
ऋतुएँ बदलती रहें,
लोग आते-जाते रहें,
समय अपनी गति से चलता रहे—

मैं उस मौन में ठहरूँ,
जहाँ कुछ बदलता नहीं।

सब बदल रहा है,
पर जो सबके बदलने को देख रहा है—
वही मेरा सत्य है।

और उसी सत्य में
शाश्वत स्थिरता है। 🌹

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