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कुंएँ का मेंढक और समुद्र की मछली|

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कुंएँ का मेंढक और समुद्र की मछली| एक कुँए मे एक मेंढक रहता था, उसका वही सँसार था। उसने आकाश भी उतना ही देखा था, जितना कुएँ के अंदर से दिखाई देता है, इसलिए उसकी सोच की सीमा कुएँ तक ही सीमित थी। एक दिन नीचे पानी के रास्ते से कुंएँ में समुद्र की एक छोटी सी मछली आ पहुंची।जब उन दोनों की बातचीत हुई । मछली ने पूछा कि तुम्हे पता है समुद्र कितना बड़ा होता है ? मेंढक ने एक छलांग लगाई बोला इतना होगा। मछली बोली -नही, इससे बहुत बड़ा है। मेंढक ने फिर एक किनारे से आधे हिस्से तक छलांग लगाई।फिर बोला इतना होगा। फिर मछली बोली कि नहीं। इस बार मेंढक ने अपना पूरा जोर लगाते हुए एक सिरे से दूसरे सिरे तक छलांग लगाई और बोला कि इससे बड़ा हो ही नही सकता, मछली बोली नही समुद्र इससे बहुत बड़ा है । मेंढक को विश्वास ही नही हुआ, उसको लगा कि मछली झूठ बोल रही है। दोनों ही अपनी अपनी जगह सही थे।अंतर था तो उनकी सोच में मछली की सोच अपने माहौल के हिसाब से थी और मेंढक की  सोच भी जिस वातावरण में वो रहता था, ठीक वैसी ही थी।मित्रों, हमारे जीवन में भी तो यही होता है। जिस वातावरण, स्थिति में हम रहते है, हमको लगता है,यही...

नाम और संस्कार

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*बच्चों का नाम बहुत सावधानी से रखें।* सनातन धर्म में सोलह संस्कार बताए गए हैं। इनमें से नामकरण संस्कार को बेहद महत्वपूर्ण संस्कार में माना गया है। नाम किसी भी व्यक्ति के लिए पूरे जीवन की पहचान होता है।          ज्योतिष के अनुसार, नाम का प्रभाव व्यक्ति के स्वभाव और भाग्य पर भी पड़ता है। इसलिए नाम रखने से पहले कुछ बातों पर विचार जरूर कर लें। तो चलिए जानते हैं कि बच्चे का नाम रखने से पहले किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए :-  *नाम के अर्थ का रखें ध्यान।* आज के समय में लोग चाहते हैं कि उनके बच्चें का नाम कुछ हटकर नया होना चाहिए। इसलिए जो नाम वे सीरियल या फिल्मों में देखते हैं, वही नाम वे अपने बच्चों का रख देते हैं, लेकिन बच्चें का नाम रखने से पहले उसका अर्थ जानना बेहद जरूरी होता है। अपने बच्चें के लिए एक ऐसा नाम चुनें जिसका अर्थ अच्छा व सकारात्मक हो, क्योंकि बच्चें के नाम का प्रभाव उसके पूरे व्यक्तित्व पर पड़ता है।। *नामकरण के लिए सही   दिन का चुनाव करें* नामकरण के लिए चुनें सही दिन-                 बच्चे के जन्...

बच्चे मन के सच्चे

गर्भस्थ शिशु को चेतना  "क्या गर्भ में पल रहे बच्चे को या दूध पीने वाले बच्चे को भी ज्ञान दिया जा सकता है"  बच्चा जितना छोटा होता है उसमें किसी भी माध्यम से विचारों को ग्रहण करने की क्षमता अधिक होती है। जब बच्चा मां के पेट में होता है तो मां का रोम-रोम उसकी आंख नाक कान होते हैं, उसका मस्तिष्क होते हैं। उसके देखने सुनने व समझने की शक्ति हजारो लाखो गुना होती है, इसलिए बच्चा मां के पेट में कहीं अधिक जल्दी सीख और समझ सकता है। जिस कार्य को सीखने के लिए  सालों या महीने लगते हैं,वह कार्य बच्चा गर्भ में घंटों में सीख सकता है। यही वह समझ थी जिस का प्रयोगिक रूप भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को सिखाया और अर्जुन ने उसका प्रयोग अपनी पत्नी पर किया। जब वह गर्भवती थी, अभिमन्यु उसके गर्भ में था  अभिमन्यु ने चक्रव्यूह तोड़ने का ज्ञान गर्भ में ही प्राप्त किया था। यदि कोई गर्भवती स्त्री चाहती है कि वह किसी विशेष बच्चे को जन्म दे। जैसे  वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर, नेता, अभिनेता या ऋषि-मुनि।  मानो वह एक श्रेष्ठ क्रिकेट खिलाड़ी को जन्म देना चाहती है, तो गर्भ के दौरान माता को चाहिए क...

सेवा की भावना

*यह कहानी किसी ने मुझे भेजी है ; अच्छी लगी तो सोचा आप सबको भी बताऊँ*   *कृपया इसे जरूर पढ़ें: ‐*  *वासु भाई और वीणा बेन* गुजरात के एक शहर में रहते हैं; आज दोनों यात्रा की तैयारी कर रहे थे  3 दिन का अवकाश था; पेशे से चिकित्सक हैं  लंबा अवकाश नहीं ले सकते थे। परंतु जब भी दो-तीन दिन का अवकाश मिलता छोटी यात्रा पर कहीं चले जाते हैं              आज उनका इंदौर- उज्जैन जाने का विचार था दोनों जब साथ-साथ मेडिकल कॉलेज में पढ़ते थे, वहीं पर प्रेम अंकुरित हुआ था और बढ़ते-बढ़ते वृक्ष बना  दोनों ने परिवार की स्वीकृति से विवाह किया 2 साल हो गए,अभी संतान कोई है नहीं, इसलिए यात्रा का आनंद लेते रहते हैं                विवाह के बाद दोनों ने अपना निजी अस्पताल खोलने का फैसला किया, बैंक से लोन लिया  वीणाबेन स्त्री-रोग विशेषज्ञ और वासु भाई डाक्टर आफ मैडिसिन हैं  इसलिए दोनों की कुशलता के कारण अस्पताल अच्छा चल निकला यात्रा पर रवाना हुए, आकाश में बादल घुमड़ रहे थे  मध्य-प्रदेश की सीमा लगभग 200 क...

जल और सकारात्मक सोच

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जल और सकारात्मक सोच विचारों का शरीर पर प्रभाव जब आप भ्रूण अवस्था में थे तब आप 99.9% पानी में थे। जब जन्म हुआ तब 90% पानी में थे। वयस्क अवस्था में 70% पानी हमारे सबके शरीर में रहता है व वृद्धावस्था में करीब 50% पानी हमारे शरीर में रहता है।       इस प्रकार जीवन की अधिकांश अवस्थाओं में पानी हमारे शरीर का मुख्य हिस्सा रहता है । जापान के डॉक्टर  श्री मसारू मोटो ने अपनी वैज्ञानिक खोज से व पानी के कणों की फोटो लेकर यह प्रमाणित किया है कि पानी के कण मधुर संगीत पर अच्छी प्रतिक्रिया दर्शाते हैं जबकि कठोर बेहूदे सुरों पर पानी के कणों का ढांचा खराब हो जाता है। उन्होंने अलग-अलग वातावरण बना कर जबप्रयोग किये और पानी के कणों के चित्र लिये तो उनके आश्चर्य का ठिकाना न रहा कि खुशी, सत्य, प्रेम व कृतज्ञता के लिये पानी के कणों ने सुंदर षटकोण बनाया।। https://youtu.be/1qQUFvufXp4    (देखें वीडियो)  जबकि जब इन्हीं पानी के कणों को एक कागज पर 'बेवकूफ' लिखकर उस जार पर लपेट दिया जिसमें यह पानी था तो क्रिस्टल की तस्वीर टेड़ी मेड़ी व वीभत्स सी बनी। थैन्कयू लिखने पर...

परम आनंद और मन का खेल

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सतत आनंद और मन की अनंत कामनायें। हर व्यक्ति जीवन में आनंद खुशियां और प्रेम चाहता है और उसकी यह मान्यता है की उसकी जो कामनाएं हैं वह पूर्ण हो जाएंगी तो उसे आनंद प्राप्त होगा यह मन का ऐसा जाल है जो व्यक्ति को कामनाएं पूरा करने में उलझा करके रखता है और व्यक्ति एक के बाद दूसरी कामना पूर्ण करता है जिससे कि उसे हर कामना पूर्ण होने पर आनंद मिलता है परंतु पूरा आनंद सतत आनंद उसे कामना रहित होने पर मिलेगा यह मन नहीं समझ पाता क्योंकि मनका एक ही प्रोग्राम है की इच्छा पूरी होगी तभी आनंद मिलेगा इसीलिए व्यक्ति निरंतरता से इच्छाएं जगाता है और उन्हें पूर्ण करने के लिए प्रयत्न करता है और यह कार्य बिना समझ के करता रहता है और इच्छा पूर्ण होने पर सुखी और अपूर्ण होने पर दुखी होता रहता है।क्या आपके साथ भी ऐसा ही हो जाता है?

शिवोऽहम् शिवोऽहम् शिवोऽहम् शिवोऽहम्

शिवोऽहम् शिवोऽहम् शिवोऽहम् शिवोऽहम् वही आत्मा सच्चिदानंद मैं हूँ ।  अमर आत्मा सच्चिदानंद मैं हूँ । शिवोऽहम् शिवोऽहम् शिवोऽहम् शिवोऽहम्   अखिल विश्व का जो परम आत्मा है,  सभी प्राणियों का वही आत्मा है ।।१।।  शिवोऽहम् शिवोऽहम् शिवोऽहम् शिवोऽहम् अमर आत्मा है मरणशील काया ,  सभी प्राणियों के जो भीतर समाया ।।२।।  शिवोऽहम् शिवोऽहम् शिवोऽहम् शिवोऽहम् जिसे न शस्त्र काटे , न अग्नि जलावे,  बुझावे न पानी ,न मृत्यु मिटावे ।।३।।  शिवोऽहम् शिवोऽहम् शिवोऽहम् शिवोऽहम् है तारों-सितारों में आलोक जिसका,  है सूरज व चंदा में आभास जिसका।।४।।  शिवोऽहम् शिवोऽहम् शिवोऽहम् शिवोऽहम् है व्यापक जो कण कण में है वास जिसका,  नहीं तीनों कालों में हो नाश जिसका।।५।।  शिवोऽहम् शिवोऽहम् शिवोऽहम् शिवोऽहम् अजर औ अमर जिसको वेदों ने गाया,  वही ज्ञान अर्जुन को हरि ने सुनाया।।६।।  शिवोऽहम् शिवोऽहम् शिवोऽहम् शिवोऽहम् शिवोऽहम् शिवोऽहम् शिवोऽहम् शिवोऽहम्